Tara Sadhna

Tara Sadhna

देवी तारा

दस महाविद्याओं में से माँ तारा की उपासना तंत्र साधकों के लिए सर्वसिद्धिकारक मानी जाती है। देवी तारा को सूर्य प्रलय की अघिष्ठात्री देवी का उग्र रुप माना जाता है।

जब चारों और निराशा ही व्याप्त हो तथा विपत्ति में कोई राह न दिखे तब मां भगवती तारा के रूप में उपस्थित होती हैं तथा भक्त को विपत्ति से मुक्त करती हैं।

Tara Sadhna

उग्र तारा, नील सरस्वती और एकजटा इन्हीं के रूप हैं। शत्रुओं का नाश करने वाली सौंदर्य और रूप ऐश्वर्य की देवी तारा आर्थिक उन्नति और भोग दान और मोक्ष की प्राप्ति के लिए सहायक मानी जाती हैं।

देवी तारा ब्रह्मांड-नायिका एवं राज-राजेश्वरी हैं। सृष्टि का समस्त ज्ञान शून्यआकाश में केंद्रित है और देवी तारा इसी शून्य में अवस्थित कही गई हैं। माँ तारा परारूपा हैं एवं महासुन्दरी कला-स्वरूपा हैं तथा देवी तारा सबकी मुक्ति का विधान रचती हैं।

 देवी तारा की साधना से लाभ

  • माँ तारा की साधना से साधक प्रखंड विद्वान बन जाता है।
  • इस साधना से साधक नकारात्मक ऊर्जा , भूत प्रेत जैसे बाधाओ से निर्भय हो जाता है।
  • इस साधना से व्यक्ति धनवान बन जाता है अर्थात धन की कभी भी कमी नहीं रहती है।
  • इस साधना से व्यक्ति जंगली जिव जंतु के भय से मुक्त हो जाता है।

माँ तारा को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए यह साधना  बुधवार के दिन से प्रारम्भ करनी चाहिए। सर्वप्रथम बुधवार के दिन  स्नान कर और गुलाबी वस्त्र धारण करके माँ तारा मूर्ति या तस्वीर के सामने इस मंत्र को पढ़ना चाहिए।

तारा साधना मंत्र  “ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट”

 

तारा साधना करने के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते है या ऊपर दी गई ईमेल आईडी पर ईमेल कर सकते है।