Kaal Sarp Dosh in Hindi

Kaal Sarp Dosh in Hindi

जब किसी की कुंडली में राहू व केतु के मध्य में सूर्य, मंगल, गुरु, शनि, चन्द्र, बुध और शुक्र आते है तब व्यक्ति अपने जीवन में कालसर्प दोष से पीड़ित होता है।

यह समय किसी भी व्यक्ति के लिये बेहद कष्ट दायक होता है। जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पडता है।

जीवन अस्थिर रहता है किसी भी समय कौन सी मुसीबत मुंह बाये खडी है इसका अंदाज लगना थोडा मुश्किल होता है।

काल सर्प दोष के प्रभाव

  1. व्यवसाय में जोखिम उठाने पडते है।
  2. स्वास्थ्य संबंधित समस्या का सामना करना पडता है।
  3. विवाह होने में दिक्कतों का सामना करना पडता है।
  4. महिलाओं को गृभ धारण करने में परेशानी होती है। कुछ महिलायें तब तक गृभ धारण नही कर पाती जब तक काल सर्प दोष उनकी कुण्डली में उपस्थित रहता है।
  5. जिस व्यक्ति की कुण्डली में काल सर्प दोष उपस्थित होता है उसे कामयाबी अपने जीवन में बहूत संर्घष से मिलती है और कुछ को तो मिलती ही नही है।
Kaal Sarp Dosh in Hindi

Kaal Sarp Dosh in Hindi

कालसर्प दोष कितने प्रकार के होते है?

कालसर्प दोष 12 प्रकार के होते है। आइये जानते है इन काल सर्प दोषों के बारे में विस्तार से

1) अनंत कालसर्प दोष जब किसी की कुण्डली में पहले घर में राहू उपस्थित हो और सातवे घर में केतु उपस्थित हो व शेष सात गृह राहू और केतु के बीच स्थित हो तो इस योग को अनंत काल सर्प दोष कहते है।

2) कुलीक कालसर्प दोषजब किसी की कुण्डली में दूसरे घर में राहू उपस्थित हो और आठवे घर में केतु उपस्थित हो व शेष सात गृह राहू और केतु के बीच स्थित हो तो इस योग को कुलीक काल सर्प दोष कहते है।

3) वासुकी कालसर्प दोष जब किसी की कुण्डली में तीसरे घर में राहू उपस्थित हो और नौवे घर में केतु उपस्थित हो व शेष सात गृह राहू और केतु के बीच स्थित हो तो इस योग को वासुकी काल सर्प दोष कहते है।

4) शंखफल कालसर्प दोष जब किसी की कुण्डली में चौथे घर में राहू उपस्थित हो और दसवें घर में केतु उपस्थित हो व शेष सात गृह राहू और केतु के बीच स्थित हो तो इस योग को शंखफल काल सर्प दोष कहते है।

5) पदम् कालसर्प दोष जब किसी की कुण्डली में पांचवें घर में राहू उपस्थित हो और ग्यारहवें घर में केतु उपस्थित हो व शेष सात गृह राहू और केतु के बीच स्थित हो तो इस योग को पदम् काल सर्प दोष कहते है।

6) महापदम कालसर्प दोष जब किसी की कुण्डली में छठे घर में राहू उपस्थित हो और बारहवें घर में केतु उपस्थित हो व शेष सात गृह राहू और केतु के बीच स्थित हो तो इस योग को महापदम काल सर्प दोष कहते है।

7) तक्षक कालसर्प दोष जब किसी की कुण्डली में सातवें घर में राहू उपस्थित हो और पहले घर में केतु उपस्थित हो व शेष सात गृह राहू और केतु के बीच स्थित हो तो इस योग को तक्षक काल सर्प दोष कहते है।

8) कर्कोटक कालसर्प दोष जब किसी की कुण्डली में आठवे घर में राहू उपस्थित हो और दूसरे घर में केतु उपस्थित हो व शेष सात गृह राहू और केतु के बीच स्थित हो तो इस योग को कर्कोटक काल सर्प दोष कहते है।

9) शंखनाद कालसर्प दोष जब किसी की कुण्डली में नौवें घर में राहू उपस्थित हो और तीसरे घर में केतु उपस्थित हो व शेष सात गृह राहू और केतु के बीच स्थित हो तो इस योग को शंखनाद काल सर्प दोष कहते है।

10) घटक कालसर्प दोष जब किसी की कुण्डली में दसवें घर में राहू उपस्थित हो और चौथे घर केतु में उपस्थित हो व शेष सात गृह राहू और केतु के बीच स्थित हो तो इस योग को घटक काल सर्प दोष कहते है।

11) विषधर कालसर्प दोष जब किसी की कुण्डली में ग्यारहवें घर में राहू उपस्थित हो और पांचवे घर में केतु उपस्थित हो व शेष सात गृह राहू और केतु के बीच स्थित हो तो इस योग को अनंत काल सर्प दोष कहते है।

12) शेषनाग कालसर्प दोष जब किसी की कुण्डली में बारहवें घर में राहू उपस्थित हो और छठे घर में केतु उपस्थित हो व शेष सात गृह राहू और केतु के बीच स्थित हो तो इस योग को शेषनाग काल सर्प दोष कहते है।

अगर आप भी इनमें से किसी एक काल सर्प दोष से पीडित है तो आप हम से जरुर संपर्क करें। हमारे अनुभावी विशेषज्ञ आपकी जरुर मदद करेंगें।

काल सर्प दोष को कम करने के उपाय सुझायेगें। एक बात का ध्यान रखें किसी भी दोष का बस असर कम किया जाता है जड़ से समाप्त नही किया जाता है।

आप हम से संपंर्क करने के लिये ईमेल व फोन का उपयोग कर सकते है। आपको अपनी कुछ निजी जानकारी जैसे जन्मतिथि, जन्म का समय, जन्म का स्थान, शुभ नाम आदि बताना होगा।  

अगर आपको जानना है की आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है की नहीं या काल सर्प दोष के उपाय क्या है, हमें भेजे अपना नाम और जन्मतिथि समय और स्थान के साथ निचे दिए गए फॉर्म से, हम आपकी कुंडली देखकर सारी जानकारी बताएँगे।