Dhumavati Sadhna

Dhumavati-Sadhna

धूमावती 

माँ धूमावती दस  महाविद्याओं  में सातवीं  महाविद्या हैं। मां धूमावती श्वेत वस्त्र धारण कि हुए हैं, तथा इनका वाहन कौवा है।

मां धूमावती के दर्शन से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। नष्ट व संहार करने की सभी क्षमताएं देवी में निहीत हैं. ऋषि दुर्वासा, भृगु, परशुराम आदि की मूल शक्ति धूमावती हैं. सृष्टि कलह के देवी होने के कारण इनको कलहप्रिय भी कहा जाता है। चौमासा देवी का प्रमुख समय होता है जब देवी का पूजा पाठ किया जाता है।

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इन्हे अलक्ष्मी या ज्येष्ठालक्ष्मी यानि लक्ष्मी की बड़ी बहन भी कहा जाता है।ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष अष्टमी को माँ धूमावती जयंती के रूप में मनाया जाता है।

माँ धूमावती जी का रूप अत्यंत भयंकर हैं इन्होंने ऐसा रूप शत्रुओं के संहार के लिए ही धारण किया है। यह भय-कारक एवं कलह-प्रिय हैं। माँ भक्तों के सभी कष्टों को मुक्त कर देने वाली है।

 धूमावती की साधना से लाभ

  • यह साधना तंत्र – मंत्र के लिए, जादू – टोना, बुरी नजर और भूत – प्रेत आदि समस्त भयों से मुक्ति के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी होता है।
  • यह साधना सभी रोगो के लिए, अभय प्रप्ति के लिए, साधना मे रक्षा के लिए, जीवन मे आने वाले हर प्रकार के दुखो को समाप्त करने में लाभकारी होता है।
  • धूमावती देवी की स्तुति का नित्य पाठ करने से मां की अमोघ कृपा प्राप्त होती है। घर का दारिद्र्य दूर होता है तथा मनुष्य को हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।
  • काले वस्त्र में काले तिल बांधकर मां को भेंट करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

 

धूमावती माता को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए यह साधना ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष अष्टमी को करने से लाभकारी होता है। सर्वप्रथम स्नान करने के बाद धूमावती माता की मूर्ति या तस्वीर के सामने इस मंत्र को पढ़ना चाहिए।

             धूमावती साधना मंत्र- “ॐ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा:”

 

धूमावती माता साधना करने के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते है या ऊपर दी गई ईमेल आईडी पर ईमेल कर सकते है।