Chinnamasta Sadhna

chinnamasta Sadhna

 छिन्नमस्ता

योगियों के लिए इनकी साधना सर्वश्रेष्ठ है। दस महा विद्याओं में छिन्नमस्ता माता छठी महाविद्या॒ कहलाती हैं। छिन्नमस्ता देवी को मां चिंतपूर्णी के नाम से भी जाना जाता है।

मार्कंडेय पुराण व शिव पुराण आदि में देवी के इस रूप का विशद वर्णन किया गया है। इनके अनुसार जब देवी ने चंडी का रूप धरकर राक्षसों का संहार किया,  दैत्यों को परास्त करके देवों को विजय दिलवाई तो चारों ओर उनका जय घोष होने लगा, परंतु देवी की सहायक योगिनियाँ अजया और विजया की रुधिर पिपासा शांत नहीँ हो पाई थी।

chinnamasta Sadhna

इस पर उनकी रक्त पिपासा को शांत करने के लिए माँ ने अपना मस्तक काटकर अपने रक्त से उनकी रक्त प्यास बुझाई। इस कारण माता को छिन्नमस्ता नाम से पुकारा जाने लगा।

 छिन्नमस्ता की साधना से लाभ

  •  छिन्नमस्ता रोजगार में सफलता, नौकरी पद्दोंन्ति के लिए, कोर्ट के कैस से मुक्ति दिलाने मे सक्षम है और पति-पत्नी को तुरंत वश   मे करने वाली चमत्कारी देवी है।
  •  यह साधना बहुत ही तीव्र है। योगियों के लिए इनकी साधना सर्वश्रेष्ठ है। जो साधक कुण्डलिनी जागरण करना चाहते हैं उन्हें यह   साधना गुरू मार्गदर्शन में अवश्य करनी चाहिए।
  •  देवी छिन्नमस्ताकी आराधना जैन तथा बौद्ध धर्म में भी की जाती हैं तथा बौद्ध धर्म में देवी छिन्नमुण्डा वज्रवराही के नाम से     विख्यात हैं।
  •  श्रीभैरवतन्त्र में कहा गया है कि इनकी आराधना से साधक जीवभाव से मुक्त होकर शिवभाव को प्राप्त कर लेता है
  •   देवी की कृपा से साधक मानवीय सीमाओं को पार कर देवत्व प्राप्त कर लेता है

 

छिन्नमस्ता माता को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए यह साधना दीपावली से शुरू करने से लाभकारी होता है। सर्वप्रथम स्नान करने के बाद माँ छिन्नमस्ता की मूर्ति या तस्वीर के सामने इस मंत्र को पढ़ना चाहिए।

 

छिन्नमस्ता साधना मंत्र- “श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीयै हूं हूं फट स्वाहा:”

 

छिन्नमस्ता माता साधना करने के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते है या ऊपर दी गई ईमेल आईडी पर ईमेल कर सकते है।