21 Mukhi Rudraksha

इक्कीस मुखी रूद्राक्ष

इक्कीस मुखी रूद्राक्ष भगवान कुबेर का स्वरुप है, जो धन-संपदा के स्वामी हैं। इसके अतिरिक्त यह रुद्राक्ष  भगवान शिव का प्रतिनिधित्व भी करता है। इक्कीस मुखी रुद्राक्ष सभी रुद्राक्षों में एक बेहतरीन रुद्राक्ष है। भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश और अन्य सभी देवी देवता इस रूद्राक्ष में निवास करते हैं। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार, जब इक्कीस मुखी रुद्राक्ष को पूजा के स्थान में रखा गया तब समस्त देवताओं ने स्वयं को इसके चारों ओर स्थापित किया ।

इक्कीस मुखी रुद्राक्ष के लाभ

  • इक्कीस मुखी रूद्राक्ष घर में रखने से शांति एवं सदभाव का वातावरण उत्पन्न होता है तथा यह रुद्राक्ष अपार समृद्धि लेकर आता है।
  • इसे पहनने से आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ता है और व्यक्ति “सनातन धर्म” की राह पर चलता है।
  • भगवान कुबेर का स्वरूप यह रुद्राक्ष धन धान्य की कमी को दूर करता है. इसे धारण करने से निर्धन भी धनवान हो जाता है, अलख निरंजन रुप में यह रुद्राक्ष व्यक्ति को भक्ति के रस में लीन कर देता है।
  • इसे रुद्राक्ष को अपनाकर मनुष्य त्रिदेवों के साथ अन्य देवों का आशीर्वाद भी पाता है।
  • यह रूद्राक्ष उन लोगों द्वारा पहना जाना चाहिए जो अपनी लाइन के शीर्ष पर हैं, या जो सीनियर ऑफिसर्स, बिग बिज़नेस, राजनेता, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निदेशक, अभिनेता, प्रोड्यूसर्स और निदेशकों की तरह अपनी लाइन के शीर्ष तक पहुंचना चाहते हैं।
  • यह रूद्राक्ष तीसरा नेत्र चक्र है, यह आज्ञा चक्र कुंडलिनी को जागृत करने में भी सहायक होता है इसे धारण करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

इक्कीस मुखी रुद्राक्ष मंत्र

नमः शिवाय

रुद्राक्ष धारण करने की विधि 

सर्वप्रथम रुद्राक्ष की माला या रुद्राक्ष, जो भी आप धारण करना चाहते हैं, उसें शुक्ल पक्ष में सोमवार के दिन धारण करें।

रुद्राक्ष को गंगाजल, दूध से स्नान कराएं तथा “ॐ नमः शिवाय” इस पंचाक्षर मंत्र का जाप करते रहें. शुद्ध करके इस चंदन, बिल्वपत्र, लालपुष्प अर्पित करें तथा धूप, दीप  दिखाकर पूजन करके अभिमंत्रित करे।.

रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराकर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके मंत्र जाप करते हुए इसे धारण करें।

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