18 Mukhi Rudraksha

18 Mukhi Rudraksha

अठारह मुखी रूद्राक्ष

अठारह मुखी रूद्राक्ष माँ पृथ्वी स्वरुप है । यह भगवान शिव के भैरव रूप का प्रतिनिधित्व करता है। भैरव भगवान शिव का क्रोधित रुप है अत: इस रूद्राक्ष के स्वामी व्यक्ति को सभी भयानक प्रभावों से बचाते हैं। इसे धारण करने वाले के शरीर में किसी भी प्रकार की कोई भी बीमारी नहीं हो पाती तथा वह हमेशा स्वस्थ्य रहकर सुखी जीवन व्यतीत करता है।

18 Mukhi Rudraksha

18 Mukhi Rudraksha

अठारह मुखी रुद्राक्ष के लाभ

  • अठारह मुखी रूद्राक्ष मातृ पृथ्वी से संबंधित है और इसलिए इसे भूमि रुद्राक्ष भी कहा जाता है। यह उन सभी लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है, जो रियल एस्टेट व्यवसाय, निर्माण, खनन और खेती जैसे माँ पृथ्वी (भूमि) से संबंधित किसी भी तरह के व्यवसाय में हैं।
  • अठारह मुखी रूद्राक्ष गर्भवती महिलाओं के लिए लाभदायक होता है इसे धारण करने से गर्भ में पल रहे शिशु कि रक्षा होती है।
  • अठारह मुखी रूद्राक्ष को पहनने से सभी प्रकार के  सम्मान, सफलता और प्रसिद्धि मिलेगी . निर्भय बनेंगे, दुर्घटनाओं और ग्रहों के बुरे प्रभाव से बचाव होगा।
  • अठारह मुखी रूद्राक्ष मधुमेह और लकवा जैसे रोगोमे आराम दिलाता है।

अठारह मुखी रुद्राक्ष मंत्र

‘ॐ नमः शिवाय’

रुद्राक्ष धारण करने की विधि 

सर्वप्रथम रुद्राक्ष की माला या रुद्राक्ष, जो भी आप धारण करना चाहते हैं, उसें शुक्ल पक्ष में सोमवार के दिन धारण करें।

रुद्राक्ष को गंगाजल, दूध से स्नान कराएं तथा “ॐ नमः शिवाय” इस पंचाक्षर मंत्र का जाप करते रहें. शुद्ध करके इस चंदन, बिल्वपत्र, लालपुष्प अर्पित करें तथा धूप, दीप  दिखाकर पूजन करके अभिमंत्रित करे।.

रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराकर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके मंत्र जाप करते हुए इसे धारण करें।

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