16 Mukhi Rudraksha

सोलह मुखी रुद्राक्ष

सोलह मुखी रुद्राक्ष को भगवान विष्णु एवं भगवान शिव का रुप माना जाता है। सोलह मुखी रुद्राक्ष, सोलह कलाओं एवं सिद्धियों का प्रतीक है,  इसे पहनने वाले को सोलह सिद्धियों का ज्ञान प्राप्त होता है। सोलह मुखी रुद्राक्ष विष्णु और शिव का संयुक्त रूप है और विजय प्राप्त होने का प्रतिनिधित्व करता है। यह रूद्राक्ष “केतु” द्वारा शासित माना गया है तथा केतु के बुरे प्रभावों से बचाता है।.

सोलह मुखी रुद्राक्ष के लाभ

  • सोलह मुखी रूद्राक्ष के पहनने पर भगवान राम का आशीर्वाद प्राप्त होता है और इसलिए वह जो भी करता है, उसमें जीत की आशीष मिलता है।
  • सोलह मुखी रूद्राक्ष जिस घर में स्थापित होता है वहाँ पे सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव, शांति और समृद्धि लाता है और यह चोरी, आग एवं दुर्घटनाओं के खिलाफ घर को सुरक्षा देता है।
  • इस रुद्राक्ष के पहनने वालों द्वारा उनके द्वारा प्रदत्त सभी पापों से छुट्टी दी गई है और उन पर सभी संसारिक सुख और शान्ति प्राप्त हुई है।
  • प्राचीन वैदिक ग्रंथों के अनुसार सोलह मुखी रूद्राक्ष  कुष्ठ रोग, क्षय रोग और अन्य फेफड़ों के संक्रमण जैसे रोगों का इलाज करने में सहायक होता है।
  • यह रूद्राक्ष भगवान शिव के महामृत्युंजय रूप है और इसलिए यह सभी प्रकार के भय, बीमारियों और प्रतिकूल परिस्थितियों से पहनने वाले की सुरक्षा करता है और जो किसी भी उपक्रम में उसे विजयी बनाता है।

सोलह मुखी रुद्राक्ष मंत्र

 ‘ॐ ह्रीं हूम’

रुद्राक्ष धारण करने की विधि 

सर्वप्रथम रुद्राक्ष की माला या रुद्राक्ष, जो भी आप धारण करना चाहते हैं, उसें शुक्ल पक्ष में सोमवार के दिन धारण करें।

रुद्राक्ष को गंगाजल, दूध से स्नान कराएं तथा “ॐ नमः शिवाय” इस पंचाक्षर मंत्र का जाप करते रहें. शुद्ध करके इस चंदन, बिल्वपत्र, लालपुष्प अर्पित करें तथा धूप, दीप  दिखाकर पूजन करके अभिमंत्रित करे।.

रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराकर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके मंत्र जाप करते हुए इसे धारण करें।

Fill This Query Form for Call Back