15 Mukhi Rudraksha

पंद्रह मुखी रुद्राक्ष

पंद्रह मुखी रूद्राक्ष पशुपतिनाथ का स्वरूप माना जाता है ।  पंद्रह मुखी रुद्राक्ष पन्द्रह तिथियों से संबंधित है।  इस रुद्राक्ष को धारण करने से अपने सभी उद्यमों में सफलता प्राप्त होती है और उर्जा शक्ति द्वारा अपने सभी कार्यों में सफलता पाता है। इस रुद्राक्ष के पहनने वाला तीव्र बुद्धि को पाता है  और वह अपने ज्ञान द्वारा सभी को प्रभावित करने में सक्षम होता है।

पंद्रह मुखी रुद्राक्ष के लाभ 

  • जो व्यक्ति लौह और रसायन के व्यापार में लगे हुए हैं उन लोगों के लिए पंद्रह मुखी रूद्राक्ष लाभदायक होता है।
  • पंद्रह मुखी रूद्राक्ष स्वास्थ्य, धन, शक्ति, ऊर्जा, समृद्धि, आत्मा के उन्नयन और आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि करता है।
  • पंद्रह मुखी रूद्राक्ष त्वचा के रोग को दूर करने में सहायक होता है. तथा पौरूष शक्ति को बढा़ने में लाभदायक होता है।
  • पंद्रह मुखी रूद्राक्ष सभी पापों को ख़त्म कर देता है और पहनने वाला मोक्ष मिलता है।

पंद्रह मुखी रुद्राक्ष मंत्र

 ‘ पशुपतय नम:’ 

रुद्राक्ष धारण करने की विधि 

सर्वप्रथम रुद्राक्ष की माला या रुद्राक्ष, जो भी आप धारण करना चाहते हैं, उसें शुक्ल पक्ष में सोमवार के दिन धारण करें।

रुद्राक्ष को गंगाजल, दूध से स्नान कराएं तथा “ॐ नमः शिवाय” इस पंचाक्षर मंत्र का जाप करते रहें. शुद्ध करके इस चंदन, बिल्वपत्र, लालपुष्प अर्पित करें तथा धूप, दीप  दिखाकर पूजन करके अभिमंत्रित करे।.

रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराकर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके मंत्र जाप करते हुए इसे धारण करें।

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