14 Mukhi Rudraksha

चौदह मुखी रुद्राक्ष

चौदह मुखी रुद्राक्ष अनमोल ईश्वरीय रत्न है, इसे साक्षात ‘देवमणी’ कहा जाता है। इसके  संरक्षक स्वय्ं भगवान शिव और महाबली हनुमान है। इस कारण से कोई भी बुरी बाधा,  भूत, पिशाच  व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुँचा पाती, व्यक्ति निर्भय होकर रहता है।  चौदह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से शक्ति सामर्थ्य एवं उत्साह का वर्धन होता है और संकट समय संरक्षण प्राप्त होता है।

चौदह मुखी रुद्राक्ष के लाभ

  • इस रुद्राक्ष को धारण करने से साधना सिद्ध होती है।
  • चौदहमुखी रुद्राक्ष परमदिव्य ज्ञान प्रदान करने वाला होता है. इसे धारण करने से देवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • यह रुद्राक्ष चौदह विद्याओं, चौदह लोकों तथा चौदह इंद्रों का स्वरूप भी कहा गया है।
  • शनि साढ़े साती, महादशा या शनि पीड़ा से मुक्ति हेतु इस रुद्राक्ष को धारण करने से बडी राहत मिलती है।
  • चौदहमुखी रुद्राक्ष के अधिपती ग्रह शनि और मंगल है  अर्थात यह रुद्राक्ष शनी तथा मंगल दोनो ग्रहोकी बाधा से उत्पन्न दोषो का निवारण करता है।

चौदह मुखी रुद्राक्ष मंत्र

  नमः शिवाय” 

रुद्राक्ष धारण करने की विधि 

सर्वप्रथम रुद्राक्ष की माला या रुद्राक्ष, जो भी आप धारण करना चाहते हैं, उसें शुक्ल पक्ष में सोमवार के दिन धारण करें।

रुद्राक्ष को गंगाजल, दूध से स्नान कराएं तथा “ॐ नमः शिवाय” इस पंचाक्षर मंत्र का जाप करते रहें. शुद्ध करके इस चंदन, बिल्वपत्र, लालपुष्प अर्पित करें तथा धूप, दीप  दिखाकर पूजन करके अभिमंत्रित करे।.

रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराकर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके मंत्र जाप करते हुए इसे धारण करें।

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